कुछ फिल्मों का क्रेज कभी कम नहीं होता है। वक्त की मार भी उसके जादू का कम नहीं कर पाती है। कुंदन शाह के निर्देशन में बनी फिल्म “जाने भी दो यारों” ऐसी ही एक फिल्म है। जो आज ही देखने पर तरोताजा लगती है। भ्रष्टाचार के थीम पर बनी इस फिल्म को बनाने वाले भी पक्के दोस्त थे। विधु विनोद चोपड़ा सुधीर मिश्रा, सतीश कौशिक, कुंदन शाह ने जैसे दिग्गजों ने फिल्म बनाने का जिम्मा उठाया तो उनके सामने सबसे बड़ी समस्या फिल्म की बजट थी। फिल्म बनाने के लिए NFDC ने महज 7 लाख रुपये का बजट तय किया था।
विधु विनोद चोपड़ा इस फिल्म के प्रोडक्शन कंट्रोलर थे… लिहाजा उनकी जिम्मेदारियां भी दूसरे लोगों से ज्यादा थी। एक एक पैसे का हिसाब उन्हें रखना पड़ता था। फिल्म के क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग आते आते पैसे लगभग खत्म हो चुके थे। एक सीन में दुशासन की एंट्री होनी थी… शूटिंग की सभी तैयारियां पूरी हो गई थी… तभी अंतिम क्षणों में दुशासन बने एक्टर ने बतौर मेहनताना दो हजार रुपये की मांग कर दी… दो हजार सुनते ही विधु भड़क गए। उन्होंने चीखते हुए कहा कि कल ही तो पांच सौ में बात तय हुई थी। विधु की बातों का उस एक्टर पर कोई असर नहीं हुआ… वो दो हजार रुपये के लिए अड़ गया। उधर शॉट के लिए दुशासन को बार बार बुलाया जा रहा था। विधु के पास इतनी बजट नहीं थी कि वो उसे दो हजार रुपये दे पाते।
एक पल सोचने के बाद विधु विनोद चोपड़ा ने बिना समय गवायें दुशासन का कॉस्टयूम पहना और सेट पर पहुंच गए। विधू विनोद जब सेट पर पहुंचे तो इतने कैरेक्टर में थे कि फिल्म के डायरेक्टर कुंदन शाह भी एक पल के लिए उन्हें पहचान नहीं पाए। इस तरह विधु ने आखिरी मिनट में सुझबुध से एक्टिंग का फैसला लेकर पैसा भी बचा लिया और क्लाइमेक्स भी शूट हो गया।