‘ए मेरी जोहरा जबीं तुझे मालूम नहीं’ यह सदाबहार गाना है 1965 में रिलीज हुई फिल्म वक्त का… इस गाने का जिक्र होते ही सबसे पहले जेहन में बलराज साहनी का चेहरा सामने आता है जिन्होंने इस फिल्म में लाला केदारनाथ के रोल निभाया है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी बलराज साहनी ने अपने जीवन में साहित्य, कला एवं संस्कृति, पत्रकारिता और सिनेमा के क्षेत्र में काफी काम किया है। ऐसे टैलेंटेड वयक्ति के घर पुलिस का छापा पड़ना… और तीन दिनों तक उनके घर की तलाशी होना… वाकई हौरान करने वाली बात है।
दरअसल इस घटना का संबंध उस चिट्ठी से है जिसे बलराज ने अपनी चचेरी बहन उर्मिला को देश की आजादी से पहले लिखा था। चिट्ठी में लिखा था कि दो बमों के लिए ऑर्डर कर दिया गया है और जल्द ही बम घर पहुंच जाएंगे। उस वक्त बलराज साहनी रावलपिंडी में रहा करते थे और उर्मिला शास्त्री मेरठ में रहती थी और कांग्रेस पार्टी की सदस्य थीं।
चिट्ठी अंग्रेजों के हाथ लग गई… बलराज साहनी के घर की तलाशी और उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी हो गया… पुलिस बलराज साहनी की गिरफ्तारी और सर्च वारंट लेकर उनके घर पहुंच गई… 3 दिनों तक उनके घर की तलाशी हुई… बम की बात तो छोड़िए पुलिस को बलराज के घर से ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिसके दम पर उन्हे गिरफ्तार किया जाए।
पुलिस के पास चिट्ठी थी लेकिन चिट्ठी में लिखे बम वाली बात झूठ निकली। काफी छानबीन के बाद जब पुलिस ने बलराज से चिट्ठी दिखाकर बम के बारे में पूछा तो मालूम हुआ कि बलराज ने चिट्ठी में जिस बम का जिक्र किया था वो तांगे में इस्तेमाल किए जाने वाले लकड़ी के वोडन शिफ्ट थी, जिन्हें हिंदी में बम भी कहा जाता है। गलत फहमी दूर हुई और फिरंगी पुलिस को बलराज साहनी के घर से खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।