सुरीली और वर्सेटाइल आवाज की धनी आशा भोसले को सिंगिंग अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर से विरासत में मिली थी… इसके बावजूद आशा जी को अपने करियर के शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा… 1948 में रिलीज हुई फिल्म चुनरिया आशा ताई की पहली हिन्दी फिल्म थी… जिसमें उन्हे हंसराज बहल के संगीत निर्देशन में ‘सावन आया’ गीत गाने का मौका मिला… आशा ताई को नया दौर के रूप में पहली बड़ी सफलता मिली। नया दौर पहली फिल्म थी जिसके सारे गीत आशा ताई ने फिल्म की लीड एक्ट्रेस के लिए गाए।

1966 में आई फिल्म तीसरी मंजिल में आशा ताई का एक नया टैलेंट देखने को मिला… क्लासिकल गाना गाने वाली आशा ताई को जब वेस्टर्न डांस नम्बर ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा …’गाने का ऑफर मिला तो उन्होंने मना कर दिया… लेकिन पंचम दा के कहने पर वो गाना गाने को तैयार हो गई…. 10 दिन के रिहर्सल के बाद जब आशा जी ने गाने की रिकॉडिंग की तो वहां मौजूद सभी लोग देखते रह गए…

1981 में आई फिल्म उमराव जान ने आशा ताई को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया… ‘दिल चीज क्या है…, इन आँखों की मस्ती के…, जैसे गज़लों को खय्याम के संगीत निर्देशन में गाकर आशा ताई ने अपना पहला राष्ट्रीय पुरस्कार जीता… हिन्दी सिनेमा में आशा भोसले के अमूल्य योगदान के लिए उन्हें साल 2000 में दादा साहेब फाल्गे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आशा ताई भले ही एक सफल गायिका रही हो लेकिन उन्हें अपने निजी जीवन में काफी उतार चढ़ाव का सामना करना पढ़ा… 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ अपने से दोगुने उम्र के गणपत राव भोसले से शादी की। उस समय भोसले लता मंगेशकर के पीए थे। इस शादी के बाद लता जी और परिवार के दूसरे सदस्य आशा जी से नाराज रहने लगे… उधर, शादी के कुछ समय बाद भोसले और आशा जी में झगड़े होने लगे… जब हदें पार हो गई तो आशा ताई ने अपने पति को छोड़ने का फैसला किया… 1980 में आशा ताई ने पंचम दा यानी की आरडी बर्मन से दूसरी शादी की… ये इन दोनों की दूसरी शादी थी…

यह जानकर आप को आश्चर्य होगा कि ‘उडें जब-जब जुल्फें तेरी’, और ‘तनहा तनहा यहां पर जीना ’जैसे सुपरहिट गाना गाने वाली आशा भोसले एक उम्दा कूक भी हैं। बहरीन, अबू धाबी, दुबई, कतर, कुवैत, मैनचेस्टर, बर्मिंघम और सउदी में आशाज (Asha’s) नाम से उनके रेस्टोरेंट हैं। लैंब मस्केट गोश्तन और चिंगरी चाप आशा भोसले की सिग्नेचर डिश हैं।