zeenat-aman-317609l

Why Bollywood actress Zeenat Amaan had to pay a heavy price to the producer of Qurbani?

Why and what for famous Bollywood actress Zeenat Amaan had to pay a heavy price to the producer of Qurbani?

Once on the set of Qurbani, Zeenat Amaan reached a couple of hours late from her schedule time, while the producer, director, actors, co star and all the crew members were waiting for her arrival, the sets were ready with the camera to roll on .
Firoz Khan was very particular about every single litle things involved with the movie but the late arrival of Zeenat on the set annoyed the producer & Actor Firoz khan and he decided to teach her a lesson. Thus, he asked her to………………………….. To know more about this, click the link below

ZEENAT AMAAN

sadhna

साधना कट हेयर स्टाइल

सत्तर के दशक में हिन्दी सिनेमा में साधना एक नई फैशन आइकॉन के रूप में उभर कर सामने आई… उनका हेयर स्टाइल हो या फिर चूड़ीदार सलवार दोनों ही उस दौर के लड़कियों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ… लेडीज पार्लर में साधना के पोस्टर्स इस बात के सुबूत थे कि उनके जैसे हेयर कट को लेकर लड़कियां किस कदर दीवानी थी। जो हेयर स्टाइल साधना कट के नाम पूरी दुनियां में मशहूर हुआ उसकी भी एक अपनी कहानी है… आप को यह जानकर आश्चर्य होगा कि साधना के कुछ कमियों को छुपाने के लिए उन्हें यह हेयर कट दिया गया था…

साधना को ये हेयर कट जानेमाने निर्देशक आर.के. नैय्यर ने दी थी। जो उन्हे लेकर ‘लव इन शिमला’ बना रहे थे… नैय्यर चाहते थे कि साधना का चौड़ा माथा हल्का सा ढ़क जाए। ताकि उनके लुक को और बेहतर बनाया जा सके। राजकपूर की फिल्म श्री 420 के एक गाने मुड़ मुड़ के ना देख में साधना बतौर बैकग्राउंड डांसर काम कर चुकीं थी। दमदार अभिनय क्षमता, आकर्षक मुस्कान और उम्दा डांसर होने के बावजूद साधना का चौड़ा माथा उन्हें एक सफल अभिनेत्री बनने से बार बार रोक रहा था। ये वो दौर था जब हीरोइन बनने की सबसे अहम बात होती थी ‌कि आप दिखती कैसी है।

नैय्यर को एक तरकीब सूझी। उन्होंने साधना को हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और ‘ब्रेकफास्ट एट टिफनीज’ की अदाकारा ‘ऑड्री हेपबर्न’ से मिलता जुलती लुक देने का फैसला किया… उन्होंने खुद बैठकर साधना के माथे के ठीक ऊपर के बाल छोटे कराए ताकि वो माथे पर लटकने लगे। हेयर कट के बाद जब साधना ने खुद को देखा तो उनका पहला रिएक्शन था कि वो पहले से ज्यादा बेकार दिख रही हैं। लेकिन उन्हें क्या पता था कि आगे चलकर यही हेयर कट उनकी पहचान बन जाएगी। देवानंद के साथ उनकी फिल्म ‘हम दोनों’ और 1965 में आई मल्टी स्टारर फिल्म ‘वक्त’ की कामयाबी के बाद साधना से ज्यादा उनके हेयर स्टाइल के चर्चे होने लगे।

asha-bhosle

सुरीली और वर्सेटाइल आवाज की धनी आशा भोसले को सिंगिंग अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर से विरासत में मिली थी

सुरीली और वर्सेटाइल आवाज की धनी आशा भोसले को सिंगिंग अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर से विरासत में मिली थी… इसके बावजूद आशा जी को अपने करियर के शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा… 1948 में रिलीज हुई फिल्म चुनरिया आशा ताई की पहली हिन्दी फिल्म थी… जिसमें उन्हे हंसराज बहल के संगीत निर्देशन में ‘सावन आया’ गीत गाने का मौका मिला… आशा ताई को नया दौर के रूप में पहली बड़ी सफलता मिली। नया दौर पहली फिल्म थी जिसके सारे गीत आशा ताई ने फिल्म की लीड एक्ट्रेस के लिए गाए।

1966 में आई फिल्म तीसरी मंजिल में आशा ताई का एक नया टैलेंट देखने को मिला… क्लासिकल गाना गाने वाली आशा ताई को जब वेस्टर्न डांस नम्बर ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा …’गाने का ऑफर मिला तो उन्होंने मना कर दिया… लेकिन पंचम दा के कहने पर वो गाना गाने को तैयार हो गई…. 10 दिन के रिहर्सल के बाद जब आशा जी ने गाने की रिकॉडिंग की तो वहां मौजूद सभी लोग देखते रह गए…

1981 में आई फिल्म उमराव जान ने आशा ताई को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया… ‘दिल चीज क्या है…, इन आँखों की मस्ती के…, जैसे गज़लों को खय्याम के संगीत निर्देशन में गाकर आशा ताई ने अपना पहला राष्ट्रीय पुरस्कार जीता… हिन्दी सिनेमा में आशा भोसले के अमूल्य योगदान के लिए उन्हें साल 2000 में दादा साहेब फाल्गे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आशा ताई भले ही एक सफल गायिका रही हो लेकिन उन्हें अपने निजी जीवन में काफी उतार चढ़ाव का सामना करना पढ़ा… 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ अपने से दोगुने उम्र के गणपत राव भोसले से शादी की। उस समय भोसले लता मंगेशकर के पीए थे। इस शादी के बाद लता जी और परिवार के दूसरे सदस्य आशा जी से नाराज रहने लगे… उधर, शादी के कुछ समय बाद भोसले और आशा जी में झगड़े होने लगे… जब हदें पार हो गई तो आशा ताई ने अपने पति को छोड़ने का फैसला किया… 1980 में आशा ताई ने पंचम दा यानी की आरडी बर्मन से दूसरी शादी की… ये इन दोनों की दूसरी शादी थी…

यह जानकर आप को आश्चर्य होगा कि ‘उडें जब-जब जुल्फें तेरी’, और ‘तनहा तनहा यहां पर जीना ’जैसे सुपरहिट गाना गाने वाली आशा भोसले एक उम्दा कूक भी हैं। बहरीन, अबू धाबी, दुबई, कतर, कुवैत, मैनचेस्टर, बर्मिंघम और सउदी में आशाज (Asha’s) नाम से उनके रेस्टोरेंट हैं। लैंब मस्केट गोश्तन और चिंगरी चाप आशा भोसले की सिग्नेचर डिश हैं।

akkiii

और अक्षय बन गए खिलाड़ी कुमार

अक्षय कुमार का फिल्मी करियर आज जिस मुकाम पर है… उसके पीछे उनकी मेहनत के अलावा खिलाड़ी सीरीज़ की फिल्मों का विशेष महत्व है। इस बात को अक्षय खुद कई मौको पर स्वीकार कर चुके हैं…

आप को यह जानकर आश्चर्य होगा कि अक्षय कुमार फ़िल्म खिलाड़ी के निर्देशक अब्बास मस्तान की पहली पसंद नहीं थे। अब्बास मस्तान सलमान के भाई अरबाज़ खान को इस फ़िल्म में लेना चाहते थे। अब्बास मस्तान चाहते थे कि अरबाज इस फिल्म से अपने करियर कि शुरुआत करें, लेकिन इस ऑफर से पहले अरबाज अपनी पहली फिल्म साइन कर चुके थे… अब्बास मस्तान के ऑफर को सुनने के बाद अरबाज़ ने अब्बास मस्तान को अपनी पहली फिल्म की शूटिंग पूरी होने तक इंतजार करने को कहा… लेकिन अब्बास मस्तान इंतजार करना नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने अक्षय कुमार के साथ फिल्म खिलाड़ी शूटिंग शुरू कर दी… इस फिल्म के बाद ‘खिलाड़ी’ सीरीज की 8 फिल्में आईं और अक्षय कुमार का नाम ही ‘खिलाड़ी’ कुमार पड़ गया.

1996 में आई खिलाड़ी सीरिज़ की एक फ़िल्म खिलाड़ियों के खिलाड़ी में अक्षय अंडरटेकर को उठा उठा के पटकते नज़र आते है… WWE  का चैंपियन अक्षय के सामने घुटने टेक देता है। एक फाइट सीन में अक्षय अंडरटेकर को अपने कंधों पर उठाए दिखते हैं… यह सीन दर्शको को खूब पसंद आया था। लेकिन क्या आप को पता है कि अंडर टेकर की भूमिका निभाने वाला शख्स कौन था। दरअसल अंडरटेकर का रोल अदा करने वाला शख्स और कोई नही बल्कि उनका हमशक्ल ब्रायन ली है… 1994 में ब्रायन ली और अंडरटेकर के बीच असली मुकाबला भी हुआ था। फिल्म के जिस सीन में अक्षय अंडरटेकर यानी कि ब्रायन ली को अपने कंधों पर उठाते हैं, इस शूट के दौरान अक्षय के पीठ में चोट लग गई थी… चोट इतनी गंभीर थी कि अक्षय शूट के दौरान बिना तकिया के सहारे बैठ नहीं पाते थे और फिर इलाज के लिए उन्हे अमेरिका जाना पड़ा।

rishi kapoora

ऋषि कपूर का पहला शॉट

क्या आप को पता है… कपूर खानदान के लाडले ऋषि कपूर ने अपने जीवन का पहला फिल्मी सॉट कब और कैसे दिया था…

बात 1955 की है… शो मैन राजकपूर श्री 420 की शूटिंग में वयस्त थे… फिल्म के सबसे हिट गाने प्यार हुआ इकरार हुआ… के एक सीन के लिए तीन चाइल्ड एक्टरों चुना गया था… जिसमें एक एक्टर महज तीन साल का था… जी हां आप ने सही सुना महज तीन साल का… इस साधारण से दिखने वाले सॉट को पूरा करने में पूरी यूनिट के पसीने छूट गए… दरअसल जैसे ही फिल्मी बारिश शुरू होती थी नन्हा कालकार अपनी आंखे बंद कर रोने लगता था… सभी लोग परेशान थे…

अंत में फिल्म की हिरोईन नरगिस ने एक तरकीब निकाली… नरगिस ने नन्हे कालकार को बतौर रिश्वत चॉकलेट देने की पेशकश की शर्त सिर्फ इतनी थी कि इसके लिए उसे नकली बारिश के दौरान ना तो रोना होगा और ना ही अपनी आंखे बंद करनी होगी…

बस फिर क्या था… चॉकलेट की बात सुनते ही नन्हे कलाकार ने फिल्मी बारिश में ना तो रोया ना ही आंखे बंद की… और सॉट ओके हो गया… ये कलाकार कोई और नहीं बल्कि कपूर खानदान का नयाब हीरा ऋषि कपूर थे… और इस गाने में ऋषि कपूर के साथ दिखने वाले दो और बच्चे कोई और नहीं बल्कि इनके बड़े भाई और बड़ी बहन है।